क्यूबा और अमेरिका के बीच गहराता युद्ध का खतरा और जमीन पर छिपी असली सच्चाई

क्यूबा और अमेरिका के बीच गहराता युद्ध का खतरा और जमीन पर छिपी असली सच्चाई

क्या अमेरिका वाकई क्यूबा पर सैन्य हमला करने की तैयारी कर रहा है? ये सवाल अचानक पूरी दुनिया के सामने खड़ा हो गया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पेंटागन ने क्यूबा पर हमले के लिए अपनी सेना और हथियारों को तैनात कर दिया है। बस डोनाल्ड ट्रंप की हरी झंडी का इंतजार है।

इस बीच क्यूबा के डिप्टी विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांडीज डी कोसियो का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा है कि अमेरिका के पास क्यूबा पर हमला करने का कोई नैतिक या कानूनी आधार नहीं है। चलिए समझते हैं कि इस बयान के पीछे की कहानी क्या है और जमीनी हकीकत क्या इशारा कर रही है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और डी कोसियो का पलटवार

अमेरिकी मैगजीन पोलिटिको की एक हालिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि पेंटागन पिछले कई महीनों से क्यूबा पर हमले के लिए रणनीति बना रहा है और सैनिकों की पोजिशनिंग कर रहा है।

इस रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए क्यूबा के डिप्टी विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांडीज डी कोसियो ने एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने सीधे पूछा कि क्या किसी संप्रभु राष्ट्र में तबाही मचाने, लोगों को मारने और अपाहिज बनाने के लिए अमेरिका के पास कोई ठोस आधार है? उन्होंने अमेरिकी मीडिया को भी आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि वे वाशिंगटन को युद्ध की ओर धकेलने का काम कर रहे हैं। Observers at Associated Press have shared their thoughts on this situation.

डी कोसियो ने अमेरिकी प्रशासन को चेतावनी भी दी कि अगर वे ऐसा कोई कदम उठाते हैं, तो खुद अमेरिकी सैनिकों की जान भी बड़े जोखिम में आ जाएगी।

सिर्फ बयानबाजी नहीं, समंदर में दिख रही भारी हलचल

अगर आपको लग रहा है कि यह सिर्फ दोनों देशों के बीच शब्दों का खेल है, तो थोड़ा रुकिए। कैरेबियन सागर में इस समय स्थिति काफी तनावपूर्ण है। अमेरिकी सेना के साउदर्न कमांड ने खुद पुष्टि की है कि उसका सबसे खतरनाक निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन क्षेत्र में पहुंच चुका है। इसमें एक विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर, कई फाइटर जेट्स और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।

इसके साथ ही इंटरनेशनल मीडिया में यह बात भी लगातार सामने आ रही है कि अमेरिकी जासूसी और सर्विलांस विमानों ने क्यूबा के हवाई क्षेत्र के आसपास अपनी उड़ानें काफी बढ़ा दी हैं। जब हवाई और समुद्री सीमा पर इतनी बड़ी सैन्य हलचल हो, तो युद्ध की आशंकाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

इस अचानक बढ़े तनाव के पीछे की तीन बड़ी वजहें

अमेरिका और क्यूबा के बीच दुश्मनी कोई नई नहीं है, लेकिन इस समय तनाव चरम पर पहुंचने के पीछे कुछ खास वजहें हैं।

  1. राउल कास्त्रो पर गंभीर आरोप: अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में क्यूबा की क्रांति के बड़े नेता राउल कास्त्रो पर 1996 के एक विमान क्रैश मामले में आरोप तय किए हैं। इस घटना में एंटी-कास्त्रो ग्रुप के दो विमानों को मार गिराया गया था। इस पुराने मामले को फिर से उठाने को क्यूबा एक बड़े बहाने के रूप में देख रहा है।
  2. ऊर्जा नाकेबंदी का संकट: पिछले कुछ समय से अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक और ऊर्जा प्रतिबंध लगा रखे हैं। स्थिति यह है कि क्यूबा को तेल की सप्लाई करने वाले देशों पर भी अमेरिका ने पाबंदियां लगा दी हैं। इस वजह से क्यूबा में बिजली और बुनियादी सुविधाओं का भारी संकट खड़ा हो गया है।
  3. घरेलू राजनीति और चुनावी नैरेटिव: अमेरिका में क्यूबा विरोधी रुख रखना हमेशा से फ्लोरिडा जैसे राज्यों में राजनीतिक फायदा पहुंचाता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन क्यूबा पर दबाव बनाकर अपनी घरेलू राजनीति को भी साधने की कोशिश कर रहा है।

क्या क्यूबा खुद ब खुद बिखर जाएगा?

अमेरिकी नेताओं की तरफ से अक्सर यह बयान आता है कि क्यूबा की व्यवस्था आर्थिक संकट के कारण खुद ही ढह जाएगी। इस पर कार्लोस फर्नांडीज डी कोसियो ने एक इंटरव्यू में बड़ा ही तार्किक सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर क्यूबा खुद ही खत्म होने वाला है, तो अमेरिका को उसे बर्बाद करने के लिए इतने संसाधन, इतनी सैन्य ताकत और इतना राजनीतिक निवेश करने की क्या जरूरत है?

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने भी माना है कि अमेरिका द्वारा क्यूबा की आर्थिक घेराबंदी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। प्रतिबंधों के कारण क्यूबा के अस्पतालों में दवाइयों और सर्जिकल उपकरणों की भारी किल्लत है। इसके बावजूद क्यूबा का नेतृत्व झुकने को तैयार नहीं है।

आगे क्या होने की संभावना है?

इतिहास गवाह है कि क्यूबा को दबाना इतना आसान नहीं रहा है। 1962 का मिसाइल संकट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए जानकारों का मानना है कि अमेरिका शायद सीधे सैन्य हमले की जगह क्यूबा को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।

लेकिन अगर कैरेबियन में अमेरिकी जहाजों की यह तैनाती किसी चूक या गलतफहमी का कारण बनती है, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर भी हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और हवाना के अगले कदमों पर टिकी हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए आप रॉयटर्स और संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइटों पर आ रहे ग्लोबल अपडेट्स को फॉलो कर सकते हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों का क्यूबा के आम नागरिकों पर क्या असर हो रहा है, इसकी पूरी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार काउंसिल की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

JR

John Reed

Drawing on years of industry experience, John Reed provides thoughtful commentary and well-sourced reporting on the issues that shape our world.