दक्षिणी स्पेन के अल्मेरिया प्रांत में तबाही का एक ऐसा मंजर देखने को मिला है जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। लॉस ग्यारडोस और बेदार के पहाड़ी इलाकों में भड़की इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस आपदा में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 23 लोग अब भी लापता हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर लोगों की जान सिर्फ इसलिए गई क्योंकि उन्होंने सुरक्षित ठिकानों पर रुकने के बजाय अपनी गाड़ियों से भागने का फैसला किया। यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह प्रशासनिक निर्देशों को नजरअंदाज करने का एक भयानक नतीजा है।
स्पेन के जंगलों में लगी भीषण आग से 12 लोगों की मौत की यह घटना कोई आम हादसा नहीं है। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को साफ चेतावनी दी थी कि वे जहां हैं वहीं रहें। बेदार गांव के मेयर और पुलिस ने घर-घर जाकर लोगों से अपील की थी कि वे अपने घरों के भीतर ही सुरक्षित रहें। इसके बावजूद कुछ लोगों ने पैनिक में आकर अपनी गाड़ियां निकालीं और सीधे मौत के जाल में जा फंसे।
गाड़ियां बनीं मौत का जाल और बंद हो गए सारे रास्ते
जब आग पहाड़ों से नीचे की तरफ तेजी से बढ़ रही थी तब बेदार गांव के कई विदेशी नागरिकों ने अपनी गाड़ियों से भागने की कोशिश की। यह उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। बेदार से लॉस ग्यारडोस को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पूरी तरह से आग की चपेट में आ चुकी थी। धुएं के गुबार के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
बचाव दल को रास्ते में चार ऐसी कारें मिलीं जो पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थीं। क्षेत्रीय आपदा प्रमुख एंटोनियो सान्ज़ के मुताबिक एक दाहिनी ओर स्टीयरिंग व्हील वाली गाड़ी में चार शव मिले। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये ब्रिटिश नागरिक थे जो इस इलाके में रह रहे थे। आठ अन्य शव गाड़ियों से कुछ दूरी पर बिखरे हुए मिले। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों को छोड़ दिया था और पैदल भागने की कोशिश की थी। लेकिन भीषण गर्मी और जहरीले धुएं ने उन्हें संभलने का मौका ही नहीं दिया। Analysts at Reuters have shared their thoughts on this trend.
स्थानीय प्रशासन की बात न मानने की भारी कीमत
यह त्रासदी हमें सिखाती है कि आपदा के समय शांत रहना कितना जरूरी है। बेदार गांव का ज्यादातर हिस्सा इस आग से पूरी तरह सुरक्षित रहा। यानी जिन लोगों ने प्रशासन की बात मानी और अपने घरों के भीतर रहे वे आज सही-सलामत हैं। इसके विपरीत जो लोग अपनी मर्जी से पहाड़ी रास्तों पर निकल गए वे सीधे आग के मुहाने पर पहुंच गए।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार गर्मियों की शुरुआत में ही जंगलों की वनस्पति पूरी तरह सूख चुकी थी। इसके बाद तेज हवाओं ने आग को इतनी रफ्तार दी कि फायरफाइटरों को भी पीछे हटना पड़ा। जब तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार हो और हवा की रफ्तार तेज हो तो आग की लपटें किसी भी गाड़ी से ज्यादा तेज दौड़ सकती हैं।
ऐसी स्थिति में खुद को बचाने के व्यावहारिक कदम
अगर आप कभी ऐसी स्थिति में फंस जाएं जहां चारों तरफ जंगल की आग फैल रही हो तो कुछ बातें आपकी जान बचा सकती हैं।
सबसे पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस के निर्देशों का पालन करें। अगर वे आपको घर के भीतर रहने के लिए कह रहे हैं तो बाहर निकलने की गलती बिल्कुल न करें। आधुनिक घर कुछ समय के लिए बाहरी आग और धुएं को रोकने में सक्षम होते हैं।
अगर आपको बाहर निकलने के लिए कहा जाता है तो केवल उन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करें जो प्रशासन द्वारा बताए गए हों। शॉर्टकट या पहाड़ी रास्तों पर अपनी गाड़ी ले जाने की भूल कभी न करें क्योंकि वहां हवा का रुख बदलते ही आग आपको घेर सकती है।
अपनी गाड़ियों में हमेशा एक इमरजेंसी किट रखें जिसमें पानी, जरूरी दवाएं और एक गीला कपड़ा हो जिसे आप धुएं से बचने के लिए मुंह पर बांध सकें। पैनिक में आकर लिया गया कोई भी फैसला जानलेवा साबित हो सकता है। शांत रहें और सही जानकारी पर ही भरोसा करें।