श्रीलंका जेल हिंसा के पीछे की वो कड़वी सच्चाई जो कोई नहीं बता रहा

श्रीलंका जेल हिंसा के पीछे की वो कड़वी सच्चाई जो कोई नहीं बता रहा

श्रीलंका की नेगोम्बो जेल से आई तस्वीरों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। जिसे मीडिया सिर्फ दो गुटों की लड़ाई बता रहा है, वो असल में एक सुलगते हुए सिस्टम का विस्फोट है। इस भीषण श्रीलंका जेल हिंसा में 4 गार्ड्स और 19 कैदियों समेत कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अस्पताल स्ट्रेचर और चीखों से पटे पड़े हैं। यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं था। यह एक प्रशासनिक लापरवाही थी जो लंबे समय से पल रही थी।

नेगोम्बो जेल दंगे की जमीनी हकीकत

सच कहूं तो यह दंगा केवल दो ड्रग गैंग्स की आपसी रंजिश तक सीमित नहीं था। जेल के भीतर एक बहुत बड़ा ड्रग नेटवर्क चल रहा था। एक धड़ा जेल प्रशासन की नाक के नीचे इस अवैध धंधे को जारी रखना चाहता था। दूसरा धड़ा इसके विरोध में खड़ा हो गया। बात रविवार शाम को शुरू हुई। कहासुनी मारपीट में बदली। देखते ही देखते सोमवार सुबह तक पूरा परिसर जंग का मैदान बन गया।

कैदियों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया। कुछ कैदियों ने तो सुरक्षा गार्ड्स से हथियार तक छीन लिए। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। जब 4 सुरक्षा गार्ड्स ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो भीड़ ने उन्हें बेरहमी से मार डाला। यह बेहद डरावना था। इस खूनी संघर्ष को रोकने के लिए बाहर से स्पेशल टास्क फोर्स और सेना को बुलाना पड़ा।

क्षमता से चार गुना ज्यादा कैदी और खोखला ढांचा

इस पूरी तबाही की सबसे बड़ी वजह क्या है? क्षमता से अधिक भीड़। श्रीलंका की जेलों की कुल क्षमता करीब 10,000 कैदियों को रखने की है। मगर आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इनमें 41,000 से ज्यादा लोग ठूंस-ठूंस कर भरे गए हैं। नेगोम्बो जेल का भी यही हाल था। एक छोटी सी कोठरी में जहां सिर्फ चार लोग रह सकते हैं, वहां बीस लोगों को बंद किया गया था।

ऐसी स्थिति में गुस्सा और तनाव भड़कना लाजमी है। जब इंसानों को जानवरों की तरह रखा जाएगा, तो वे हिंसक ही होंगे। जेल के अधिकारी इस बात को अच्छी तरह जानते थे। फिर भी उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। यह सबसे बड़ी गलती थी।

महिलाओं का विरोध और छत का गिरना

इस खूनी ड्रामे के बीच एक और दर्दनाक मोड़ आया। बगल के हिस्से में बंद महिला कैदियों ने जब पुरुषों के बैरक से गोलियों और चीखों की आवाजें सुनीं, तो वे दहशत में आ गईं। अपनी जान बचाने और रिहाई की मांग को लेकर दर्जनों महिलाएं जेल की छत पर चढ़ गईं।

तभी एक बड़ा हादसा हो गया। जर्जर हो चुकी छत का एक हिस्सा भारी दबाव के कारण ढह गया। कई महिला कैदी मलबे में दबकर घायल हो गईं। हवा में उड़ते सेना के हेलीकॉप्टर और ड्रोंस केवल तमाशा देख रहे थे। जमीन पर स्थिति को संभालने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।

अब आगे क्या करना जरूरी है

इस भयावह घटना से सबक लेकर श्रीलंका सरकार को तुरंत अपनी जेल प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे। सबसे पहले जेलों से भीड़ कम करने के लिए कम गंभीर अपराध वाले बंदियों को जमानत पर रिहा करना चाहिए। इसके अलावा, जेल के भीतर सक्रिय ड्रग सिंडिकेट को खत्म करने के लिए कर्मचारियों की सघन जांच जरूरी है क्योंकि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतना बड़ा नेटवर्क नहीं चल सकता।

अब खोखले बयानों और जांच कमेटियों के गठन का समय बीत चुका है। अगर आज कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ऐसी और भी कई हिंसक घटनाएं देखने को मिलेंगी। सरकार को तुरंत प्रभाव से घायल कैदियों और सुरक्षाकर्मियों के परिवारों को सुरक्षा और वित्तीय सहायता पहुंचानी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम पर अधिक जानकारी के लिए और ग्राउंड रिपोर्ट देखने के लिए आप यह वीडियो देख सकते हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=_LNAHp5D-A8

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Ava Wang

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