दुनिया के सामने शांति का राग अलापना और अंदरूनी तौर पर आतंकियों को पनाह देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है। ये बात एक बार फिर साबित हो गई। जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर हाफिज तलहा सईद से मिलने पहुंच गए, तो पूरी दुनिया हैरान रह गई। लेकिन क्या सच में ये हैरानी वाली बात है? शायद नहीं। पाकिस्तान का इतिहास ही ऐसा रहा है। वह अपनी हरकतों से कभी बाज नहीं आता।
<p>जब एक तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है और वो दुनिया से कर्ज मांग रहा है, तब उसके नेता खुलेआम आतंकियों के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं। हाफिज तलहा सईद कोई मामूली नाम नहीं है। वो हाफिज सईद का बेटा है, जिसने भारत में न जाने कितने बेगुनाहों का खून बहाया है। भारत ने उसे पहले ही आतंकी घोषित कर रखा है। अब पाकिस्तान के सरकारी ओहदे पर बैठा शख्स उससे गले मिल रहा है। ये सीधा संदेश है कि पाकिस्तान की सत्ता और वहां के आतंकी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।</p>
<h2>आतंकवाद और पाकिस्तान का ये खतरनाक गठजोड़</h2>
<p>सच तो ये है कि पाकिस्तान में सेना और सरकार सिर्फ मुखौटा हैं। असली ताकत आज भी उन्हीं के पास है जो नफरत की दुकान चलाते हैं। हाफिज तलहा सईद से मुलाकात कोई इत्तेफाक नहीं थी। ये एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पाकिस्तान की सरकार अपनी कट्टरपंथी जनता और आतंकी गुटों को ये भरोसा दिलाना चाहती है कि वो उनके साथ है। उसे अंतरराष्ट्रीय दबाव की कोई परवाह नहीं है।</p>
<p>भारत ने हमेशा से वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की इस पोल को खोला है। एफएटीएफ (FATF) की ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए पाकिस्तान ने कई वादे किए थे। उसने कहा था कि वो आतंकियों पर लगाम लगाएगा। उनकी फंडिंग रोकेगा। लेकिन ये मुलाकात दिखाती है कि वो सारे वादे सिर्फ कागज पर थे। जमीन पर तो आज भी वही पुराना 'टेररिस्तान' फल-फूल रहा है।</p>
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<p class="bold">हाफिज तलहा सईद कौन है?</p>
<p>हाफिज तलहा सईद लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का बेटा है। वो इस आतंकी संगठन की भर्ती और प्रोपेगेंडा विंग को संभालता है। भारत सरकार ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत व्यक्तिगत आतंकी घोषित किया है। उसका काम युवाओं का ब्रेनवाश करना और उन्हें भारत के खिलाफ उकसाना है।</p>
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<h2>दुनिया को धोखा देने की नाकाम कोशिश</h2>
<p>पाकिस्तान को लगता है कि वो दुनिया की आंखों में धूल झोंक देगा। वो कहता है कि हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन जब आपके पीएम के सलाहकार खुद आतंकी कमांडर के घर या दफ्तर जाकर हाजिरी लगाएं, तो आप किस मुंह से आतंकवाद के खिलाफ होने का दावा कर सकते हैं? ये शर्मनाक है। ये उन हजारों लोगों का अपमान है जिन्होंने आतंकवाद की वजह से अपनी जान गंवाई है।</p>
<h3>क्या पाकिस्तान पर फिर से प्रतिबंध लगने चाहिए</h3>
<p>इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी नींद से जागना होगा। सिर्फ कड़ी निंदा से काम नहीं चलेगा। जब तक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और उसकी सत्ता पर सख्त प्रतिबंध नहीं लगेंगे, वो नहीं सुधरेगा। उसे पता है कि वो बार-बार गलती करेगा और फिर माफी मांगकर या थोड़े दिन शांत रहकर बच जाएगा। इस बार खेल अलग होना चाहिए।</p>
<p>हमें ये समझना होगा कि पाकिस्तान की नीयत कभी साफ नहीं रही। वो कश्मीर का नाम लेकर अपनी जनता को गुमराह करता है और उसी आड़ में आतंकियों को पालता है। हाफिज तलहा सईद जैसे लोग वहां खुलेआम रैलियां करते हैं। उन्हें सरकारी सुरक्षा मिलती है। ये किसी भी सभ्य देश के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।</p>
<h2>भारत के लिए इसके क्या मायने हैं</h2>
<p>भारत को अपनी सुरक्षा नीति में और भी कड़ा रुख अपनाना होगा। हमें उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि पाकिस्तान कभी बदलेगा। उसकी रगों में भारत विरोध दौड़ता है। जब तक वहां की सत्ता और सेना आतंकियों को अपना 'एसेट' मानती रहेगी, शांति की बात करना बेकार है। भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के जरिए ये साफ कर दिया है कि अब हम घर में घुसकर मारेंगे।</p>
<p>हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की अपनी कोशिशें और तेज करनी होंगी। ये मुलाकात एक बड़ा सबूत है जिसे हर मंच पर उठाया जाना चाहिए। दुनिया को बताया जाना चाहिए कि जिस देश के हाथ कटोरा है, उसके दिल में आज भी बम और बारूद ही है।</p>
<p>ईमानदारी से कहूं तो पाकिस्तान की इन हरकतों से मुझे अब ज्यादा आश्चर्य नहीं होता। बस दुख इस बात का है कि वहां की मासूम जनता ऐसे नेताओं और आतंकियों के बीच पिस रही है। वहां गरीबी चरम पर है, बिजली नहीं है, खाना नहीं है, लेकिन आतंकियों के लिए पूरा समर्थन है। ये विनाश की ओर बढ़ता हुआ रास्ता है।</p>
<p>अब समय आ गया है कि पाकिस्तान के खिलाफ केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर भी घेराबंदी की जाए। उसकी हरकतों का जवाब उसी की भाषा में देना होगा। दुनिया को ये समझना होगा कि अगर पाकिस्तान को नहीं रोका गया, तो वो पूरे दक्षिण एशिया की शांति को निगल जाएगा। अब चुप रहने का वक्त निकल चुका है।</p>
<p class="bold">पाकिस्तान को अब अपनी पहचान एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में बनानी होगी, वरना इतिहास उसे सिर्फ एक 'फेल्ड स्टेट' के रूप में ही याद रखेगा।</p>